Highlights
- दिल्ली दंगा मामले में कोर्ट ने 12 आरोपियों को गंभीर आरोपों से बरी किया।
- मुरसलीन हत्या मामले में गवाहों ने अभियोजन की कहानी का समर्थन नहीं किया।
- हिमांशु ठाकुर को चोरी की संपत्ति रखने के मामले में कोर्ट ने दोषी ठहराया।
नई दिल्ली: उत्तर-पूर्वी दिल्ली में फरवरी 2020 में हुए दंगों से जुड़े एक मामले में दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने 12 आरोपियों को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने इन सभी को गैरकानूनी जमावड़ा, दंगा, आगजनी, हत्या, सबूत मिटाने, डकैती, लोगों की भावनाएं भड़काने समेत कई गंभीर आरोपों से बरी कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में नाकाम रहा। बता दें कि यह मामला गोकुलपुरी इलाके में दंगों के दौरान मारे गए मुरसलीन की हत्या से भी जुड़ा हुआ है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रवीण सिंह ने 25 अगस्त को अपना फैसला सुनाते हुए 12 आरोपियों को इन आरोपों से बरी किया।
कोर्ट ने आरोपियों को बरी करते हुए क्या कहा?
बरी किए गए आरोपियों में लोकेश सोलंकी, पंकज शर्मा, अंकित चौधरी उर्फ फौजी, प्रिंस उर्फ डीजे वाला, जतिन शर्मा उर्फ रोहित, हिमांशु ठाकुर, विवेक पंचाल उर्फ नंदू, ऋषभ चौधरी उर्फ तपस, सुमित चौधरी उर्फ बादशाह, टिंकू अरोड़ा, संदीप उर्फ मोगली और साहिल उर्फ बाबू शामिल हैं। कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष यह साबित नहीं कर पाया कि आरोपियों ने भारतीय दंड संहिता यानी कि IPC की धारा 144, 147, 148 और 149 के तहत गैरकानूनी जमावड़े और दंगे से जुड़े अपराध किए थे।
अन्या धाराओं में भी साबित नहीं हुए आरोप
इसके अलावा धारा 302, 201, 432, 435 और 34 के साथ धारा 149 के तहत हत्या, सबूत मिटाने और आगजनी जैसे आरोप भी साबित नहीं हो सके। इसी तरह धारा 395 और 396 के तहत डकैती और डकैती के दौरान हत्या तथा धारा 153A और 505 के तहत लोगों के बीच दुश्मनी और भावनाएं भड़काने से जुड़े आरोप भी साबित नहीं हुए। अदालत ने कहा कि इन सभी आरोपों को संदेह से परे साबित करने में अभियोजन पक्ष असफल रहा। इसलिए सभी आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए इन अपराधों से बरी किया जाता है।
हिमांशु ठाकुर पर एक आरोप साबित
हालांकि, कोर्ट ने आरोपी हिमांशु ठाकुर को चोरी की संपत्ति रखने के मामले में दोषी पाया। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष ने संदेह से परे यह साबित कर दिया है कि हिमांशु ठाकुर ने IPC की धारा 411 के तहत अपराध किया है। धारा 411 चोरी की संपत्ति को जानते हुए रखने से संबंधित है। इस मामले में हिमांशु ठाकुर को इसी अपराध के लिए दोषी ठहराया गया है। बता दें कि दिल्ली दंगों के दौरान IB ऑफिसर अंकित शर्मा की हत्या के मामले में कोर्ट ने बीते दिनों पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन समेत 5 दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
'सिर्फ भीड़ का हिस्सा होना ही काफी नहीं'
आरोपियों को बरी करते हुए अदालत ने कहा कि किसी आरोपी के भीड़ का हिस्सा होने की बात साबित हो जाना अकेले पर्याप्त नहीं है। उसके खिलाफ यह भी दिखाना जरूरी है कि उसने खुद क्या अपराध किया और उसके व्यक्तिगत कृत्य के बारे में ठोस सबूत क्या हैं। जज ने कहा कि अगर आरोपियों को भीड़ का हिस्सा माना भी जाए, तब भी हर आरोपी के खिलाफ यह साबित करना जरूरी था कि वह घातक हथियार से लैस था। कोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई सबूत नहीं है, जिसमें गैरकानूनी जमावड़े के दौरान किसी भी आरोपी के पास कोई हथियार होने की बात बताई गई हो। ऐसे में अभियोजन पक्ष IPC की धारा 144 के जरूरी तत्व भी साबित नहीं कर पाया।
चश्मदीद गवाह भी अभियोजन के साथ नहीं आए
कोर्ट ने मुरसलीन की हत्या से जुड़े सबूतों पर भी विस्तार से गौर किया। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष ने जिन लोगों को हत्या का चश्मदीद गवाह बताया था, उनमें से किसी ने भी अभियोजन की कहानी का समर्थन नहीं किया। इन गवाहों ने यह भी नहीं कहा कि उन्होंने 25 फरवरी 2020 को शाम करीब 4 से 4:30 बजे जोहरीपुर पुलिया पर दंगाई भीड़ द्वारा मुरसलीन की हत्या होते हुए देखी थी। अदालत ने कहा कि इस स्थिति में हत्या के आरोप को साबित करने के लिए कोई पर्याप्त सबूत नहीं बचता। कोर्ट ने यह भी कहा कि रिकॉर्ड में डकैती का कोई सबूत नहीं है।
सरकारी वकील ने भी माना, पर्याप्त प्रमाण नहीं
सुनवाई के दौरान विशेष लोक अभियोजक (SPP) ने भी माना कि अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ IPC की धारा 302, 395 और 396 के तहत हत्या और डकैती जैसे अपराध साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत पेश नहीं कर पाया है।कोर्ट ने भी रिकॉर्ड में मौजूद सबूतों के आधार पर पाया कि हत्या और डकैती के आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त प्रमाण नहीं हैं।
नाले में मिला था मुरसलीन का शव
अभियोजन के मुताबिक, 28 फरवरी 2020 को सुबह करीब 10:13 बजे गोकुलपुरी थाने को सूचना मिली थी कि जोहरीपुर तिराहे के पास नाले में एक शव पड़ा हुआ है। पुलिस ने शव को GTB अस्पताल भेजा, जहां उसका मेडिकल लीगल केस (MLC) तैयार किया गया। इसके बाद शव को GTB अस्पताल की मोर्चरी में सुरक्षित रखवा दिया गया। इससे पहले 1 मार्च 2020 को नर्गिस ने गोकुलपुरी थाने में अपने पति के लापता होने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। बाद में 12 मार्च 2020 को नर्गिस ने शव की पहचान अपने पति मुरसलीन के रूप में की थी। (ANI से इनपुट्स के साथ)
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